Bahishkrit Hitakarini Sabha

Dr. Babasheb Ambedkar convened a meeting on 9 March 1924, at the Damodar Hall, Bombay, to consider the desirability of establishing a central institution Bahishkrit Hitkarini Sabha

क्या आप जानते हैं बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने बहिष्कृत हितकारिणी सभा (Bahishkrit Hitakarini Sabha) की स्थापना किसलिए किया था? और यह सभा अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में कितनी सफल हुयी? इस प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए सम्पूर्ण लेख को ध्यान से पढ़ें.

भारत के महान समाज सुधारक और स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माता, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर, ने 20 जुलाई 1924 को महाराष्ट्र के मुंबई (तब बंबई) में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की. इस सभा के माध्यम से बाबा साहब समाज के वंचित और दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना चाहते थे. सभा का को समाज के वंचित वर्गों के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए प्रयास करना था. इस वर्ग के लोगों को तत्कालीन भारतीय समाज ने हाशिये पर धकेल रखा था.

समाज के वंचितों और दबे कुचले वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष Baba Saheb Ambedkar Ki Virasat का एक महत्वपूर्ण भाग है.

डॉ. अम्बेडकर ने देखा कि जाति-व्यवस्था के कारण अछूत कहे जाने वाले समुदायों को शिक्षा, रोजगार और समानता के अधिकार से वंचित किया गया था. समाज में उनकी कोई आवाज नहीं थी. बाबा साहेब का मानना था कि शिक्षा और संगठन के माध्यम से इन वंचित वर्गों की स्थिति में सुधार किया जा सकता है. उन्होंने ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ का मंच इन लोगों को दिया, जहां उनकी समस्याओं को सुना जा सके और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया जा सके.

इस सभा के माध्यम से बाबा साहेब ने तीन मुख्य उद्देश्यों पर काम किया:

  1. शिक्षा का प्रचार: दलित समुदाय को शिक्षित करना, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें
  2. संगठन का निर्माण: वंचित वर्गों को संगठित करना, ताकि वे सामूहिक रूप से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें
  3. सामाजिक न्याय की मांग: समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए संघर्ष करना

शुरुआती दिनों में बाबा साहेब को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. वंचित वर्गों को संगठित करना आसान नहीं था, क्योंकि वे सदियों से डर और पराधीनता के अभ्यस्त हो गए थे. लेकिन बाबा साहेब ने हार नहीं मानी. उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों को शिक्षित होने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया.

बहिष्कृत हितकारिणी सभा के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्कूलों की स्थापना, छात्रवृत्ति योजनाएँ, और समाज सुधार के लिए जनजागरण अभियान शामिल थे. इस सभा ने वंचित वर्गों को सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए जागरूक किया. इसके परिणामस्वरूप, वंचित वर्गों ने राजनीतिक प्रक्रियाओं (Political Processes)में भाग लेना शुरू किया और अपनी स्थिति सुधारने के लिए संगठित प्रयास (Organised Efforts)किए.

‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ ने बाबा साहेब को उनके उद्देश्य प्राप्त करने में बड़ी मदद की. इस सभा के माध्यम से:

  • हाशिये पर पड़े समाज को शिक्षा और जागरूकता का महत्व समझ में आया
  • दलित समुदाय को एकजुट होने का एक मंच प्राप्त हुआ. इस मंच के आंदोलन ने वंचित समुदाय को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी
  • आयोजित आंदोलनकारी गतिविधियों ने ब्रिटिश सरकार को भी वंचितों के सामाजिक अधिकारों पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया

एक बार बाबा साहेब एक गाँव में सभा करने गए। वहाँ उन्होंने एक किसान से पूछा, “तुम्हारे बच्चे स्कूल क्यों नहीं जाते?” किसान ने जवाब दिया, “हम अछूत हैं, हमें स्कूल में नहीं घुसने दिया जाता.” यह सुनकर बाबा साहेब ने उस गाँव में एक स्कूल खोलने का निर्णय लिया और वादा किया कि शिक्षा के माध्यम से उनका भविष्य बदलेगा. कुछ वर्षों बाद, उसी किसान का बेटा पढ़-लिखकर शिक्षक बन गया. यह बाबा साहेब की ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की सफलता की एक झलक थी.

डॉ. अम्बेडकर की ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ ने भारतीय समाज में एक क्रांति का बीज बोया. यह सभा न केवल वंचित वर्गों के लिए शिक्षा और अधिकारों का माध्यम बनी, बल्कि यह सामाजिक समानता की नींव भी थी. बाबा साहेब का यह प्रयास आज भी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो समाज में समानता और न्याय की स्थापना का सपना देखता है.

बहिष्कृत हितकारिणी सभा, दलितों के कल्याण के लिए डॉ॰ भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित एक संस्था थी. इसकी स्थापना 20 जुलाई, 1924 को मुंबई में हुई थी. इस सभा का मकसद, वंचित और शोषित वर्ग के लोगों को सामाजिक और राजनीतिक बराबरी का अधिकार दिलाना था. 

बहिष्कृत हितकारिणी सभा के बारे में कुछ और खास बातें:

  • इस सभा के ज़रिए दलितों के लिए स्कूल, छात्रावास, और लाइब्रेरी खोली गईं
  • इस सभा के संस्थापक सिद्धांत थे, ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, और आंदोलन करो’
  • इस सभा के ज़रिए दलितों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया गया
  • इस सभा के ज़रिए दलितों के बीच सामाजिक-राजनीतिक जागरूकता बढ़ाई गई
  • इस सभा का मकसद, दलितों को आत्मविश्वास हासिल कराना भी था

अगर यह लेख आप को उपयोगी लगा हो तो आप कमेंट करके जरूर बताएं.

Comments

आपके Comments का दिल से स्वागत है!