ग्रीन कलर में लिखा हुआ टेक्स्ट राजनीतिक नफरत पर कविता है. केवल कविता पढ़ने के लिए हरे रंग में लिखे टेक्स्ट को ही पढ़ें.
आजकल राजनीति में नफरत का बोलबाला है. राजनीतिक प्रतिद्वंदी एक दूसरे से केवल सिद्धांतों के आधार ही कम्पटीशन नहीं करते हैं. वे एक दूसरे से व्यक्तिगत तौर पर नफरत करते हैं. इसी पर मैंने यह कविता लिखा जो यह बताती है कि किस प्रकार एक राजनीतिक व्यक्ति अपने विरोधी से नफरत करते हुए नैतिकता की सारी सीमाएं लांघ जाता है. कविता का इंट्रोडक्टरी स्टैंज़ा (Introductory Stanza) निम्नलिखित है.
क्यों बौखलाई ए ईरानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
इस पोस्ट में उल्लिखित कविता की वीडियो यूट्यूब पर आप देख सकते हैं.
राजनीतिक हित विभिन्न प्रकार के होते हैं. उदाहरण के लिए पार्टी के राजनीतिक हित, राजनीतिक व्यक्ति के राजनीतिक हित. पार्टी और व्यक्ति दोनों के अनंतिम राजनीतिक हित सत्ता में होते हैं. इसलिए दोनों सत्ता पाने और सत्ता में बने रहने के लिए कार्य करते हैं. अपने इस कार्य, लक्ष्य की प्राप्ति के प्रयास, में जब वे नैतिकता का परित्याग कर देते हैं, विभिन्न दावेदारों के बीच नफरत पैदा होती है.
निर्लज़्ज़ कहके तुमने राहुल को गाली दिया
विवेकानंद का अपमानकर्ता उनको कहा
क्यों करती हो ऐसी बदजुबानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
नैतिकता के परित्याग की स्थिति को अनैतिकता कहते है. अनैतिकता यानि अनैतिक व्यवहार के विभिन रूप होते हैं. उदाहरण के लिए – झूठ बोलना, गलत आरोप लगाना, चरित्र हनन करना, क्रोध और गुस्से के वशीभूत होकर विपक्षी को बुरा भला कहना इत्यादि.
Page Contents …
क्या है विषय वस्तु राजनीतिक नफरत पर कविता की?
एक राजनीतिक व्यक्ति का व्यक्तिगत चरित्र जो समाज में भ्रामक वक्तव्य देकर innocent जनता के मन में विकार पैदा करने की कोशिश करता है इस अपडेट में लिखी कविता का केंद्र विन्दु है.
कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने 7 सितम्बर, 2022 को भारत जोड़ो यात्रा शुरू किया. यह यात्रा दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से शुरू होकर भारत के उत्तर में कश्मीर तक जायेगी. 3500 किमी से भी ज्यादे लम्बी दूरी की इस सम्पूर्ण यात्रा में राहुल गाँधी शामिल रहेंगे.
BJP Leader Smriti Irani ने शनिवार, 10 सितंबर को बेंगलुरु में भारतीय जनता पार्टी के जनस्पंदन कार्यक्रम में बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कन्याकुमारी में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की शुरुआत करते हुए स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि नहीं देने का आरोप लगाया.
तुम्हें अपनी वाणी पे संयम नहीं है
आक्रामक होके तू झूठ बोलती है
क्यों हिंसक और झूठ तेरी वानी
क्यों हिंसक और झूठ तेरी वानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
राजनीतिक नफरत इतनी कि बिना जांच किये झूठे आरोप लगाया
स्मृति ईरानी का राहुल गाँधी पर आरोप निराधार और झूठा था. यह आरोप उन्होंने बिना तथ्यों की जांच किये ही लगाया. राहुल से शायद ईरानी इस कदर नफरत करती हैं कि बस उन्हें आरोप लगाना था हर हाल में. क्यों कि वह जनता के बीच राहुल के विरुद्ध भ्रम फैलाना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने राहुल ने कन्या कुमारी में विवेकानंद मेमोरियल जाकर विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित किया या नहीं इसका पता भी नहीं लगाया. और आरोप लगाया कि राहुल ने विवेकानंद को प्रणाम नहीं किया.
छोड़ो नफरत सुसभ्य बनो व्यवहार से
गरिमामई बनो मन वाणी और करम से
क्यों बेवजह राहुल से खिसियानी
क्यों बेवजह राहुल से खिसियानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
पकड़ा गया ईरानी का झूठ
ईरानी का झूठ तब पकड़ा गया जब कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर यह साबित किया कि राहुल गाँधी ने कन्या कुमारी में स्वामी विवेकानन्द मेमोरियल जाकर उनकी मूर्ति की परिक्रमा किया, उन्हें श्रद्धांजलि दिया और प्रणाम किया.

नफरत जिसका कोई नैतिक आधार नहीं
अतीत में, स्मृति ईरानी ने दिल्ली में घटित हुए दुष्कर्म के विरोध में उस समय के PM मनमोहन सिंह को चूड़ियां भेजवाने की पेशकश किया था. पूरा देश रेप की उस घटना से आक्रोशित था. ईरानी का आक्रोशित होना भी स्वाभाविक था. लेकिन जब वैसी ही रेप की घटना हाथरस में हुयी तब उन्होंने PM नरेंद्र मोदी को चूड़ियां भेजवाने की पेशकश नहीं किया, न ही उन्होंने कोई आक्रोश और गुस्सा दिखाया. उनका यह व्यवहार बहुत ही अनैतिक और गैरजिम्मेदाराना है. जनता आज याद दिलाती है स्मृति ईरानी को उनके इस व्यवहार की.
आज याद करो तुम उस दुष्कर्म काण्ड को
जब आक्रोश में चूड़ियाँ तू भेजी मनमोहन को
ऐसी ही घटना हाल में जब घटी हाथरस में
क्यों न मोदी को चूड़ियां भेजवानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
क्यों बौखलाई ए ईरानी
पूछ रही तुमसे जनता हिंदुस्तानी
अन्य कविताएं
इस राजनीतिक नफरत पर कविता के अलावा कुछ अन्य राजनीतिक कविताएं निम्नलिखित हैं: