भारत के राष्ट्रीय TV चैनलों पर आजकल किस तरह की चर्चा होती है? देश ये चैनल चर्चा की गुणवत्ता के आधार पर ही आजकल Godi Media के नाम से जाने जाते हैं.
एक आम धारणा है कि यह मीडिया 2014 से सरकार के पक्ष में रिपोर्टिंग करने में लिप्त है. इस मीडिया में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तर के टीवी समाचार चैनल हिस्सेदार हैं.
इस गोदी मीडिया के इरादों को मैंने एक कविता के माध्यम से व्यक्त किया है.
इन टीवी चैनलों द्वारा रिपोर्टिंग एक विशेष समुदाय के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाती है. साथ ही, ये चैनल एक अन्य खास समुदाय के पक्ष में खबरें प्रसारित करते हैं. इस प्रकार मुख्य धारा की यह मीडिया विभिन्न समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा देने में लिप्त हो गयी है.

मीडिया को Facts रिपोर्ट करना चाहिए. ऐसा करने के बजाय, मीडिया आरएसएस के एजेंडे को पूरा करने के लिए काम कर रहा है.
दरअसल, आरएसएस अपनी राजनीतिक शाखा बीजेपी के जरिए देश पर राज कर रहा है.
मीडिया का लक्ष्य आरएसएस को खुश करना है.
इसलिए यह तथ्य की Reporting नहीं करती है. इसके बजाय यह मीडिया आरएसएस की विचारधारा का पक्षपाती हो गयी है.
इतना ही नहीं, मीडिया आजकल Ruling Alliance के सबसे बड़े दल भाजपा को खुश करने का काम कर रही है.
Page Contents …
मुख्य धारा की मीडिया अर्थात Godi Media के खतरनाक इरादे
गोदी मीडिया किस तरह समाज का विघटन करना चाहती है? सुनिए कविता के इस भाग में.

गोदी मीडिया सत्तादल के गुणगान में क्यों लगी हुयी है?
- एनडीए का नेतृत्व करने वाली भाजपा 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आयी थी. विपक्ष बहुत कमजोर था. 2019 के संसदीय चुनावों के बाद लगभग यही स्थिति है
- भाजपा को हिंदुओं का बहुत मजबूत समर्थन था और अब भी है। भारत में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय है. 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद बड़ी संख्या में हिंदुओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की
- बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोग कुछ टीवी चैनलों के मालिक हैं और उन्हें नियंत्रित करते हैं
- भाजपा के लिए 2014 के चुनावों में पैसा लगाने वाले व्यवसायी बीजेपी की मदद करने के बदले में सरकार से लाभ प्राप्त करना चाहते हैं
- मीडिया अपने लिए सरकारी विज्ञापनों से राजस्व में बड़ा हिस्सा हथियाना चाहती है
- मीडिया की सरकार के प्रति एक आशंका है. आशंका यह है कि अगर वह BJP और RSS के एजेंडे को पूरा करने में मदद नहीं करती है तो सरकार उसे परेशान करेगी
मणिपुर के दंगों में मीडिया की रिपोर्टिंग कैसी रही?
3 या 4 मई, 2023 से मणिपुर हिंसा और नफरत की आग में जल रहा है. क्या स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने कोई सकारात्मक कदम आगे बढ़ाया? सुप्रीम कोर्ट को हालत पर स्वतः संज्ञान क्यों लेना पड़ा?
सुन सुन राजभोगी सुन, सुन सुन मीडिया गोदी सुन
नफरत की आंधी बही, अमन मणिपूर में ना रही
सुन सुन राजभोगी सुन, सुन सुन मीडिया गोदी सुन
नफरत की आंधी बही, अमन मणिपूर में ना रही
सत्य से न केवल कतराया, सत्य को पूरा छिपाया मीडिया
देशभक्त कहलाती जो मीडिया, सत्ता के गुण जाती जो मीडिया
अमित शाह नजदीक जो मीडिया, हिंसक खबर दबायी जो मीडिया
मीडिया जब चाटुकार रहे, हिंसा दंगे भड़क रहे
हिंसा दंगे भड़क रहे, विघटन पथ मणिपूर चले
सत्ता संग विदेश वो जाए, जनधन पर वो मौज उड़ाए
मणीपूर न जाए वो मीडिया, खबर जनता से छिपाए वो मीडिया
जानी दुश्मन समुदायों को बनाये, लोकतंत्र की हत्या कराये मीडिया
सत्ता संग मिल खेल करे, मणिपुर में नफरत फैले
मणिपुर में नफरत फैले, मणिपुर में एका न रहे
मणिपुर में एका न रहे, देश में एका न रहे
दिल्ली के दंगों के दौरान मीडिया की रिपोर्टिंग कैसी रही?
मणिपुर के दंगों के पहले देश की राजधानी दिल्ली में फ़रवरी, 2020 में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे. ये क्यों भड़के थे? इन दंगों के दौरान केंद्र सरकार द्वारा हिंसा रोकने के लिए क्या एक्शन लिया गया? इस दौरान मीडिया की रिपोर्टिंग में क्या दंगों की हक़ीक़त उजागर हुयी या मीडिया ने किसी एजेंडा के तहत रिपोर्टिंग की?
23 फरवरी की पूर्व संध्या पर पूर्वोत्तर दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी और सीएए समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच दंगे भड़के थे. हिंसा ने सांप्रदायिक रूप ले लिया था और अगले 10 दिनों के दौरान 53 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. 200 से अधिक लोग घायल हो गये हुए थे. दुकानें और घर जला दिए गए हुए थे. और पूजा स्थलों पर भी हमले हुए थे.
भारत की मुख्य धारा की मीडिया ने उपरोक्त परिस्थितियों में जो भूमिका निभायी, उसके मद्दे नजर इस मीडिया को गोदी मीडिया कहना एकदम सही है. यह मीडिया यह सुनिश्चित करने का काम करती है कि सत्ता दल के इरादे पूरे हों.
अन्य कविताएं
Godi Media भारत के लोकतंत्र को निरंकुश तंत्र की ओर ले जा रही है. पढ़िए लोकतंत्र पर निम्न कविताएं.